Thursday, November 8, 2012


URAD KI DAAL & BADAA EK SAATH NA KHAAYEIN: ; मित्रो आयूर्वेद के अनुसार कभी भी दो विरुद्ध वस्तूये एक साथ नहीं खानी चाहिए । विरुद्ध वस्तुओ से अभिप्राय ऐसी वस्तूए जिनका गुण - धर्म अलग हो । ऐसी कुछ 103 चीज़े आयूर्वेद में बाताई गई है । जो एक साथ कभी नहीं खानी चाहिए । उदाहरण के लिये प्याज और दूध कभी एक साथ न खाये । एक दुसरे के जानी दुशमन हैं । इसको खाने से सबसे ज्यादा चमड़ी के रोग आपको होगें दाद,खाज ,खुजली,एगसिमा ,सोराईसिस, आदि । ऐसी ही कटहल (jack fruit )और दूध कभी न खाये । ये भी जानी दुश्मन हैं । ऐसे ही खट्टे फ़ल जिनमे सिट्रिक ऐसिड होता है कभी न खायें । एक सिट्रिक ऐसिड तो इनसान का बनाया है एक भगवान का बनाया है । जैसे संतरा । कभी दूध के साथ न खाये । आयुर्वेद के अनुसार अगर कोई खट्‌टा फ़ल दूध के साथ खाने वाला है वो एक ही है आवला । आवला दूध के साथ जरुर खाये । इसी तरह शहद और घी कभी भी एक साथ न खायें । आम की दोस्ती दूध से जबरद्स्त हैं लेकिन खट्टे आम की नहीं |इसलिये मैग़ो शेक पी रहे है तो ध्यान रखे आम खट्‌टा ना हो । । ऐसी ही उरद की दाल और दही एक दुसरे के जानी दुशमन हैं । उरद की दाल पर भारत में जितनी रिसर्च हो चुकी हैं तो ये पता लगा ये दालो की राजा है । हमेशा अकेले ही खाये दही के साथ तो भूल कर भी ना खाये । आप इसका अपने शरीर पर परिकक्षण करे । एक खाने से पहले अपना b.P चैक करें । फ़िर उरद की दाल और दही खाये । आप पायेगें 22 से 25 % आपका B.P बढ़ा हुआ होगा । अर्थात ये अगर रोज रोज आप उरद की दाल , दही खा रहें है तो 5,6 महीने में हार्ट अटैक आ ही जायेगा । इसका मतलब (दही वाड़ा ) कभी नहीं । क्योंके दही वाड़ा मे अगर वाड़ा उरद की दाल का बना हैं । और आप उसे दही के साथ खा रहें है तो बहुत तकलीफ़ करने वाला है । हां अगर आपको खाना है तो जरुर खायें लेकिन दही के साथ नहीं चटनी के साथ खायें । इस लिये अगर घर में विवाह है तो मीनो बनाते समय जरुर ध्यान रखें । उरद की दाल का वड़ा दही के साथ परोस कर दोहरे पाप के भागी न बने । क्योंके आतिथि देवो भव । मेहमान भगवान का रुप हैं । उसके हनिकारक वास्तुये न खिलाये । या वो वड़ा मूंग की दाल का बनवाये । उरद की दाल का है तो दही के साथ नहीं चटनी के साथ खाये । WITH PRAYERS FOR YOUR GOOD HEALTH, BHOO PRAKASH bhooprakash.sharma@gmail.com

आयुर्वेद: Manage VAT, PITTA & KAPHA: आयुर्वेद मुख्यतः पारंपरिक और महर्षि होते हैं । जो महर्षि आयुर्वेद है वो पारंपरिक आयुर्वेद पर हीं आधारित है जिसे योगी महेश ने शास्त्रीय ग्रंथों का अनुवाद करके लिखा है। दोनों प्रकार के आयुर्वेदिक उपचार में शरीर के दोष को दूर किया जाता है और लगभग एक हीं तरह का उपचार किया जाता है । आयुर्वेद के अलावा महर्षि महेश ने अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने मंा परम चेतना की भूमिका पर जोर दिया है, जिसके लिए उन्होनें ट्रान्सेंड ैंटल ध्यान (टीएम) को प्रोत्साहित किया है । इसके अलावा महर्षि महेश के विचार सकारात्मक भावनाओं पर जोर देती है जो शरीर की लय को प्राकृतिक जीवन के साथ समायोजित करती है । दोष और उपचार आयुर्वेद मानता है कि जिस तरह प्रत्येक व्यक्ति के उँगलियों के निशान अलग अलग होते हैं उसी तरह हर किसी की मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा अलग अलग पैटर्न की होती है । आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति में तीन बुनियादी ऊर्जा मौजूद होती हैं जिन्हें दोष कहा जाता है , जो निम्न प्रकार के होते हैं : • वात: यह शारीरिक ऊर्जा से संबंधित कार्यों की गति को नियंत्रण में रखता है, साथ ही रक्त परिसंचरण, श्वशन क्रिया , पलकों का झपकाना , और दिल की धड़कन में उचित संतुलन ऊर्जा भेजकर उससे सही काम करवाता है । वात आपके सोचने समझने की शक्ति को बढ़ावा देता है, रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है लेकिन अगर यह असंतुलित हो गया तो घबराहट एवं डर पैदा करता है। • पित्त: यह शरीर की चयापचय क्रिया पर नियंत्रण रखता है, साथ ही पाचन, अवशोषण, पोषण, और शरीर के तापमान को भी संतुलित रखता है। अगर पित्त की मात्रा संतुलन में हो तो यह मन में संतोष पैदा करता है तथा बौधिक क्षमता को बढाता है लेकिन यह अगर असंतुलित हो गया तो अल्सर एवं क्रोध पैदा करता है। • कफ: यह ऊर्जा शरीर के विकास पर नियंत्रण रखता है । यह शरीर के सभी भागों को पानी पहुंचाता है, त्वचा को नम रखता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है । उचित संतुलन में कफ की ऊर्जा मनुष्य के भीतर प्यार और क्षमा की भावना भर देती है लेकिन इसके असंतुलन पर मनुष्य ईर्ष्यालू हो जाता है और वह खुद को असुरक्षित महसूस करने लगता है । आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति में ये तीन दोष पाए जाते हैं , लेकिन किसी किसी व्यक्ति में केवल 1 या 2 दोष ही पूरी तरह से सक्रिय रहतें हैं । इन दोषों का संतुलन कई कारणों से असंतुलित हो जाता है मसलन तनाव में रहने से या अस्वास्थ्यकर आहार खाने से या प्रतिकूल मौसम की वजह से या पारिवारिक रिश्तों में दरार के कारण । तत्पश्चात दोषों की गड़बड़ी शरीर की बीमारी के रूप में उभर कर सामने आती!! With Prayers for Your Good Health, Bhoo Prakash bhooprakash.sharma@gmail.com

DOMESTIC TREATMENT FOR HEART DISEASES:-
दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनिया जो दवाइया भारत मे बेच रही है ! वो अमेरिका मे 20 -20 साल से बंद है ! आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है ! वो आज कल दिल के रोगी (heart patient) को सबसे दी जा रही है !! भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे heart attack आए !लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक ्टर के पास ! और आपको मालूम ही है एक angioplasty आपरेशन आपका होता है ! angioplasty आपरेशन मे डाक्टर दिल की नली मे एक spring डालते हैं ! उसको stent कहते हैं ! और ये stent अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है ! और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपए मे बेचते है और ऐसे लूटते हैं आपको ! और एक बार attack मे एक stent डालेंगे ! दूसरी बार दूसरा डालेंगे ! डाक्टर को commission है इसलिए वे बार बार कहता हैं angioplasty करवाओ angioplasty करवाओ !! इस लिए कभी मत करवाए ! तो फिर आप बोलेंगे हम क्या करे ????! आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे बहुत बहुत ही सरल है ! पहले आप एक बात जान ली जिये ! angioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता !! क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है !! वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है ! और कुछ दिन बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाएगी ! और फिर दूसरा attack आता है ! और डाक्टर आपको फिर कहता है ! angioplasty आपरेशन करवाओ ! और इस तरह आपके लाखो रूपये लूटता है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकाल जाती है ! ! ! अब पढ़िये इसका आयुर्वेदिक इलाज !! ______________________ हमारे देश भारत मे 3000 साल एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !! उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! ये उनमे से ही एक सूत्र है !! वागवट जी लिखते है कि कभी भी हरद्य को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियो मे blockage होना शुरू हो रहा है ! तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अमलता ) बढ़ी हुई है ! अमलता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! अमलता दो तरह की होती है ! एक होती है पेट कि अमलता ! और एक होती है रक्त (blood) की अमलता !! आपके पेट मे अमलता जब बढ़ती है ! तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है ! और अगर ये अमलता (acidity)और बढ़ जाये ! तो hyperacidity होगी ! और यही पेट की अमलता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अमलता(blood acidity) होती !! और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अमलीय रकत (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! इलाज क्या है ?? वागबट जी लिखते है कि जब रकत (blood) मे अमलता (acidty) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो छारीय है ! आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! अमलीय और छारीय !! (acid and alkaline ) अब अमल और छार को मिला दो तो क्या होता है ! ????? ((acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )????? neutral होता है सब जानते है !! _____________________ तो वागबट जी लिखते है ! कि रक्त कि अमलता बढ़ी हुई है तो छारीय(alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अमलता (acidity) neutral हो जाएगी !!! और रक्त मे अमलता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! ये है सारी कहानी !! अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो छारीय है और हम खाये ????? आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो छारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! और अगर आ गया है ! तो दुबारा न आए !! _________________ सबसे ज्यादा आपके घर मे छारीय चीज है वह है लोकी !! जिसे दुदी भी कहते है !! english मे इसे कहते है bottle gourd !!! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई छारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! या कच्ची लोकी खायो !! स्वामी रामदेव जी को आपने कई बार कहते सुना होगा लोकी का जूस पीयों- लोकी का जूस पीयों ! 3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लोकी का जूस पिला पिला कर !! और उसमे हजारो डाक्टर है ! जिनको खुद heart attack होने वाला था !! वो वहाँ जाते है लोकी का रस पी पी कर आते है !! 3 महीने 4 महीने लोकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है ! वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे ! वो कहते है हम न्योर्क गए थे हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! वो राम देव जी के यहाँ गए थे ! और 3 महीने लोकी का रस पीकर आए है ! आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! और वो इतने हरामखोर है आपको नहीं बताते कि आप भी लोकी का रस पियो !! तो मित्रो जो ये रामदेव जी बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! वागवतट जी कहते है रकत की अमलता कम करने की सबे ज्यादा ताकत लोकी मे ही है ! तो आप लोकी के रस का सेवन करे !! कितना करे ????????? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !! कब पिये ?? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !! या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !! _______________ इस लोकी के रस को आप और ज्यादा छारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत छारीय है !! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! पुदीना बहुत छारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत छारीय है !! लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!! तो मित्रो आप इस लोकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!! _____ कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !! और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !! With Prayers for your Good Health Always, Bhoo Prakash bhooprakash.sharma@gmail.com